साहित्य के योगदान से क्रांतिकारी आंदोलन में आए परिवर्तनः राजस्थान के संदर्भ में एक ऐतिहासिक अध्ययन
Keywords:
क्रांतिकारी आंदोलन, राजस्थान का साहित्य, राष्ट्रवादी चेतना, औपनिवेशिक प्रतिरोधAbstract
प्रस्तुत शोध पत्र इस तथ्य का विश्लेषण करता है कि किस प्रकार साहित्य ने राजस्थान के क्रांतिकारी आंदोलनों की दिशा और दशा को बदला। राजस्थान में 1857 से 1947 के मध्य हुए संघर्षों में साहित्य केवल घटनाओं का विवरण मात्र नहीं था, बल्कि वह जन-चेतना को संगठित करने का सबसे प्रभावी माध्यम था। केसरी सिंह बारहट, विजय सिंह पथिक और जयनारायण व्यास जैसे सेनानियों की रचनाओं ने जनमानस में ’भय’ को ’आत्मसम्मान’ में बदल दिया। यह शोध प्राथमिक और माध्यमिक ऐतिहासिक स्रोतों के आधार पर यह स्पष्ट करता है कि साहित्य ने किस प्रकार सामंती और ब्रिटिश दमन के विरुद्ध एक वैचारिक क्रांति को जन्म दिया।
References
सिंह, भगवती प्रसाद (1987). राजस्थान का स्वतंत्रता संग्राम, राजस्थान हिंदी ग्रंथ अकादमी।
बारहट, केसरी सिंह. चेतावनी रा चूँगट्या एवं अन्य कृतियां।
गोपा, सागरमल. जैसलमेर का गुंडाराज और रघुनाथ सिंह का मुकदमा।
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