सिंचाई प्रणाली के द्वारा कृषि सुधारः एक भौगोलिक अध्ययन

Authors

  • राजेन्द्र सिंह शोधार्थी (भूगोल विभाग), टांटिया विश्वविद्यालय, श्रीगंगानगर
  • डॉ. मुकेश कुमार सहायक आचार्य (भूगोल विभाग), टांटिया विश्वविद्यालय, श्रीगंगानगर

Keywords:

सिंचाई प्रणाली, कृषि सुधार, फसल विविधीकरण

Abstract

प्रस्तुत शोध पत्र कृषि उत्पादकता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विकास में सिंचाई प्रणाली की भूमिका का विश्लेषण करता है। भारत जैसे कृषि प्रधान देश में, जहाँ मानसून अनिश्चित है, सिंचाई प्रणालियाँ (नहर, नलकूप, ड्रिप और स्प्रिंकलर) कृषि सुधार के मुख्य स्तंभ हैं। यह अध्ययन भौगोलिक दृष्टिकोण से यह जाँचता है कि कैसे सिंचाई की उपलब्धता फसल सघनता, फसल विविधीकरण और भूमि उपयोग प्रतिरूप में परिवर्तन लाती है। शोध के निष्कर्ष बताते हैं कि आधुनिक सिंचाई तकनीकें न केवल जल की बचत करती हैं बल्कि शुष्क क्षेत्रों को भी उपजाऊ कृषि भूमि में परिवर्तित करने की क्षमता रखती हैं। 

References

चौहान, बी.एस. (2018): भारत का भूगोल, आर.के. पब्लिकेशन्स।

तिवारी, आर.सी. (2020): कृषि भूगोल, प्रयाग पुस्तक भवन।

Ministry of Agriculture: Annual Report on Irrigation and Crop Productivity (2022).

Hussain, Majid (2015): Systematic Agricultural Geography.

ICAR Reports: Impact of Micro-irrigation in Arid Regions.

Downloads

Published

2026-01-24

How to Cite

सिंचाई प्रणाली के द्वारा कृषि सुधारः एक भौगोलिक अध्ययन . (2026). International Journal of Global Innovations and Modern Research, 1(1), 23-25. https://ijgimr.com/index.php/journal/article/view/11

Similar Articles

You may also start an advanced similarity search for this article.